Sunday, 15 April 2018

देश की राजधानी दिल्ली में पिछले एक सप्ताह में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग करने से छह लोगों के लाखों रुपयों को लूट लिए गये। एटीएम कार्ड को क्लोन करके कुछ मिनटों में अकाउंट से सारा पैसा निकाल लिया। फ्रॉड के यह केस दिल्ली के लक्ष्मी नगर, दिल्ली यूनिवर्सिटी, हौज खास, लोधी कॉलोनी, खान मार्केट और नेहरू प्लेस में दर्ज किए गए हैं। 

 

डेबिट कार्ड था साथ मे, फिर भी लूट गए
जिन लोगों के साथ यह फ्रॉड हुआ उन सबके पास उनका एटीएम कार्ड मौजूद था। उनको इतना वक्त भी नहीं मिला कि वो एटीएम कार्ड को ब्लॉक करा पाते। यह हादसा आपके साथ भी हो सकता है। ऐसे में सावधानी रखना जरूरी है। 

आपके मोबाइल की बैटरी कब फट सकती है?


स्कीमिंग से पलक झपकते अकाउंट हो जाता है खाली
जिस क्रेडिट या डेबिट कार्ड का आप शॉपिंग में इस्तेमाल करते हैं उसका फायदा जालसाज भी उठा सकते हैं। आपके कार्ड का डुप्लीकेट सिर्फ पांच सेकेंड में तैयार हो जाता है। आम बोलचाल में जिसे कार्ड की क्लोनिंग कहते हैं, हैकर्स की दुनिया में इसे स्कीमिंग के नाम से जाना जाता है।

पलक झपकने भर की देर आपको हजारों-लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है। जालसाजों को आपके कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप का डाटा हाथ लग जाए तो फर्जी कार्ड बनाना बेहद आसान है। 

ऐसे होती है क्रेडिट कार्ड की स्कीमिंग

क्रेडिट या डेबिट कार्ड पर जो मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, उसमें आपका 400 करेक्टर का व्यक्तिगत डाटा फीड होता है। एक चार इंच की डिवाइस जिसे स्कीमर कहा जाता है, इस खेल का मुख्य हथियार है। इस मशीन पर कार्ड को स्वेप करते ही कार्ड में मौजूद व्यक्तिगत डाटा स्कीमर कॉपी कर लेता है।
इस डाटा में आपका 16 अंकों का कार्ड नंबर, नाम, एक्सपायरी डेट से लेकर सिग्नेचर कॉपी हो जाता है। इस डाटा से बेफिक्र होकर ऑनलाइन शॉपिंग की जा सकती है।

ऐसा बनता है डुप्लीकेट कार्ड
क्लोनिंग करने वाले जालसाज बैंक का मोनोग्राम और हूबहू कार्ड तैयार नहीं कर सकते। ऐसे में ये लोग स्कीमर में कॉपी किया गया डाटा एक प्लेन कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप में कॉपी कार्ड मशीन के जरिए एक स्वैप में ही सेव कर लेते हैं।

सबसे खास बात यह है कि नकली कार्ड के प्लेन होने के कारण शॉपिंग के लिए इसका इस्तेमाल मिलीभगत के बाद ही किसी शोरूम में किया जा सकता है। खरीदारी का बिल देते वक्त क्रेडिट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक डाटा कैप्चर मशीन (ईडीसी) में स्वैप करते ही मास्टर या वीजा कार्ड अपने सर्वर से जुड़ जाता है।

मैग्नेटिक स्ट्रिप का डाटा सर्वर पर मौजूद डाटा से सत्यापित होता है। कार्ड के ऊपर मौजूद नंबर सर्वर पर नहीं होता है, इससे पूरे कार्ड का सत्यापन बैंक के आंकडों से नहीं होता। सर्वर इतनी ही जानकारी देता है कि कार्ड के जरिए भुगतान होने वाली राशि ग्राहक के पास मौजूद है या नहीं। इस तकनीकी खामी का फायदा जालसाज उठा लेते हैं।

कैसे बरतें सावधानी

सबसे बड़ा खतरा पेट्रोल पंप और रेस्टोरेंट में होता है। बड़े शोरूम या मॉल के मुकाबले छोटी दुकानों पर डाटा चोरी करने की संभावनाएं ज्यादा हैं। ध्यान रखें की कार्ड ईडीसी के अतिरिक्त किसी दूसरी मशीन में स्वैप न किया गया हो। अपने सामने कार्ड स्वैप कराएं।
अपना बैंक स्टेटमेंट लगातार चेक करें। ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करें। ये भी ध्यान रखें कि बैंक के किसी कागजात में आपके कार्ड की फोटो कॉपी ऑन लाइन न कर दी गई हो। कार्ड के पीछे मौजूद अपना तीन अंकों का कार्ड वेरीफीकेशन वैल्यू (सीवीवी) किसी को न दें। क्रेडिट कोर्ड नंबर और सीवीवी नंबर की जानकारी भी इंटरनेट के जरिए खरीदारी करा सकती है।

7 हजार में मिल रहा है चीन में बना डिवाइस
पुलिस के मुताबिक एटीएम कार्ड को क्लोन करने वाला डिवाइस चीन में बन रहा है और यह देश में 7 हजार रुपये से भी कम कीमत पर मिल रहा है। कई नामी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर भी इसे खरीदा जा सकता है। 

 

 

No comments:

Post a Comment

83 Box Office: पहले सोमवार को रणवीर सिंह की फिल्म 83 का हुआ ऐसा हाल, जानें- चार दिनों का कलेक्शन

  नई दिल्ली, जेएनएन।  रणवीर सिंह की फिल्म 83 की हालत बॉक्स ऑफिस पर अच्छी नहीं है। ओपनिंग वीकेंड में नेट कलेक्शन का अर्द्ध शतक लगाने से चूकी ...

Click on tha page